राँची जिले में मत्स्य उत्पादन के बदलते स्वरूप का एक दशकीय विश्लेषण (2015-2025): विकास दर और भविष्य की संभावनाएं
DOI:
https://doi.org/10.64429/Keywords:
मत्स्य पालन, वार्षिक चक्रवृद्धि विकास दर, राँची, आर्थिक व्यवहार्यता, नील क्रांति, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनाAbstract
यह शोध पत्र राँची जिले में मत्स्य उत्पादन के बदलते स्वरूप का एक दशकीय विश्लेषण (2015-2025) प्रस्तुत करता है । अध्ययन का मुख्य निष्कर्ष यह है कि राँची जिले ने पिछले एक दशक में मत्स्य उत्पादन की मात्रा में लगभग 160% से अधिक की वृद्धि दर्ज की है, जिसके परिणामस्वरूप 10.12% की वार्षिक चक्रवृद्धि विकास दर (CAGR) प्राप्त हुई है । यह सकारात्मक परिवर्तन मुख्य रूप से 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (PMMSY) जैसे नीतिगत हस्तक्षेपों और पारंपरिक तालाब पालन से आधुनिक तकनीकों जैसे 'केज कल्चर' और 'बायोफ्लॉक' की ओर सफल तकनीकी संक्रमण का परिणाम है । आर्थिक दृष्टिकोण से, राँची में मत्स्य पालन अत्यंत व्यवहार्य पाया गया है, जिसका लाभ-लागत अनुपात (BCR) 21.4 के उच्च स्तर पर है । हालाँकि, शोध इस ओर भी संकेत करता है कि वर्तमान मॉडल मुख्य रूप से आजीविका और आर्थिक लाभ पर केंद्रित है, जिससे स्थानीय और स्वदेशी प्रजातियों (जैसे महासीर) के संरक्षण की उपेक्षा हो रही है । भविष्य की सफलता के लिए शोध में विपणन अवसंरचना में सुधार, उत्पादन लागत में कमी और पारिस्थितिक संतुलन को नीतियों में शामिल करने का सुझाव दिया गया है ।
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