प्राचीन भारत में युद्ध और विश्व शांति पर कौटिल्य के विचारों का ऐतिहासिक विश्लेषण
DOI:
https://doi.org/10.64429/Keywords:
कूटनीति, संधि, युद्ध, शांति, अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संबंध, मंडल सिद्धांत, षड्गुण्य नीतिAbstract
राजनीतिक चिंतन के इतिहास में प्राचीन भारत का प्रमुख स्थान है। प्राचीन काल में हिंदू शासको ने न केवल राज्य की विधि व्यवस्था को सुदृढ़ और सशक्त बनाने का प्रयास किया बल्कि दूसरे राज्यों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाने के भी नीति अपनाई थी जिसमें विभिन्न प्रकार की कूटनीतियों, संधि, समझौते एवं पर राष्ट्रों के साथ संबंधों की स्थापना की जाती थी। युद्ध का प्रयोग अंतिम शस्त्र के रूप में होता था। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने कहा है कि भारत में युद्ध का पूरे देश पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता था। प्राचीन धर्म ग्रंथ एवं स्मृतियां इस बात की साक्षी है कि जब कोई राजा यह अनुभव करता कि उसकी सेना शत्रु राज्यों की अपेक्षा अधिक बलवान और उत्साही है तो वह युद्ध की घोषणा कर देता था। किसी भी देश का राजा अपने साम्राज्य का विस्तार करने हेतु युद्ध का सहारा लेता था परंतु उसका यह अर्थ नहीं है कि प्राचीन काल के चिंतकों ने विभिन्न राज्यों के बीच युद्ध को त्याग कर सद्भावपूर्ण संबंध स्थापित करने और शांति स्थापित करने की ओर ध्यान नहीं दिया। अधिकांश भारतीय चिंतकों ने युद्ध के परित्याग का संदेश दिया और विश्व शांति स्थापित करने के बीज बोए हैं। इस दिशा में भारतीय राजनीतिक चिंतक महर्षि कौटिल्य के विचारों को नकारा नहीं जा सकता है। भारतीय राजनीतिक इतिहास में कौटिल्य विलक्षण प्रतिभाशाली व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ अर्थशास्त्र में विभिन्न राज्यों के बीच परस्परिक संबंध, राजनय , विदेश नीति, कूटनीति आदि पर विचार प्रकट किया है। वह एक यथार्थवादी और व्यावहारिक राजनीति का प्रणेता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डाला है। अन्य भारतीय चिंतकों के समान कौटिल्य भी विभिन्न राज्यों की पारस्परिक संबंधों के दो आधार युद्ध और संधि बताते हैं। कौटिल्य ने युद्ध संबंधी विषयों जैसे युद्ध के अवसर, युद्ध के औचित्य, युद्ध के नियमों, युद्ध क्रिया आदि सभी पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला है। दूसरी ओर, कौटिल्य ने पर राष्ट्र संबंध स्थापित करने के लिए मंडल सिद्धांत और षड्गुण्य नीति का उल्लेख किया जिसमें विश्व शांति की झलक दिखाई देती है। प्रस्तुत शोध पत्र में प्राचीन भारत में युद्ध और विश्व शांति पर कौटिल्य के विचारों का विश्लेषण किया गया है।
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